*
देसवा की धरती पे पक रहे अमवा
गूंज रही कोयल की कूक ,
बदरा पे धूप सजे मनवा माँ हूक उठे ,
बिरही जियरवा टूक टूक!
*
खेत धन-लछमी ,अँगनवा में गोरिया ,
बाली उमरिया तहू पे लड़कौरिया .
चुरियन की खनक संग अंग में उछाह
दुई हाथन पछोरे भरि सूप !
*
अबकि बार सारो निपाट देई करजा ,
सहर लै जाइ के घुमाइ लाई ओहिका ,
नैनन में चाव भरे सपन सजाय
दमक-दमक नई चूनर में रूप
*
पी-पी पपीहरा गुँजाइ रह बनवा ,
जागत हिलोर उमगात मोर मनवा ,
ढमक ढोल बाजे ,मंजीर खनखनावे,
बजे चंग नेह-रंग रहे डूब !
*
देसवा की धरती पे पक रहे अमवा
गूंज रही कोयल की कूक ,
बदरा पे धूप सजे मनवा माँ हूक उठे ,
बिरही जियरवा टूक टूक!
*
खेत धन-लछमी ,अँगनवा में गोरिया ,
बाली उमरिया तहू पे लड़कौरिया .
चुरियन की खनक संग अंग में उछाह
दुई हाथन पछोरे भरि सूप !
*
अबकि बार सारो निपाट देई करजा ,
सहर लै जाइ के घुमाइ लाई ओहिका ,
नैनन में चाव भरे सपन सजाय
दमक-दमक नई चूनर में रूप
*
पी-पी पपीहरा गुँजाइ रह बनवा ,
जागत हिलोर उमगात मोर मनवा ,
ढमक ढोल बाजे ,मंजीर खनखनावे,
बजे चंग नेह-रंग रहे डूब !
*
